रायपुर में लौटी अंगाकर रोटी की परंपरा: दिनभर नहीं लगने देती भूख.

रायपुर
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News18•25-12-2025, 18:07
रायपुर में लौटी अंगाकर रोटी की परंपरा: दिनभर नहीं लगने देती भूख.
- •दामरूधर नायक ने रायपुर में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक अंगाकर रोटी को पुनर्जीवित किया, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण.
- •अंगाकर रोटी, जिसे पनपुरवा रोटी भी कहते हैं, चावल, उड़द दाल, गेहूं, ज्वार और बाजरा से बनी पौष्टिक रोटी है.
- •इसे पारंपरिक तरीके से नीचे आग और ऊपर गर्म कोयले से पकाया जाता है, जो लंबे समय तक भूख नहीं लगने देती.
- •टमाटर, हरी मिर्च और धनिया की सिलबट्टे पर पिसी चटनी के साथ परोसी जाती है, जो दूर-दूर से ग्राहकों को आकर्षित करती है.
- •यह पहल पारंपरिक भोजन को बढ़ावा देती है, किफायती दाम (₹25-₹100) पर उपलब्ध है और 6-7 लोगों को रोजगार देती है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: दामरूधर नायक ने छत्तीसगढ़ की अंगाकर रोटी को सफलतापूर्वक पुनर्जीवित किया, विरासत और पोषण को बढ़ावा दिया.
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