तेलंगाना का प्राचीन वीरभद्र स्वामी मंदिर: रौद्र रूप, अनोखी परिक्रमा और चढ़ावे की परंपरा.
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News18•16-03-2026, 16:20
तेलंगाना का प्राचीन वीरभद्र स्वामी मंदिर: रौद्र रूप, अनोखी परिक्रमा और चढ़ावे की परंपरा.
•तेलंगाना में स्थित श्री वीरभद्र स्वामी मंदिर लगभग 1000 साल पुराना है, जिसका निर्माण वेंगी चालुक्य राजा भीम राजू ने कराया था और काकतीय शासक बीटा राजू प्रथम ने मरम्मत करवाई थी.
•मंदिर के गर्भगृह में भगवान वीरभद्र स्वामी अपने रौद्र, पश्चिममुखी रूप में 10 भुजाओं और 3 नेत्रों के साथ विराजमान हैं; साथ में देवी भद्रकाली की भी पूजा होती है.
•भक्त मन्नत पूरी होने पर गीले कपड़ों में जमीन पर लेटकर अनोखी परिक्रमा करते हैं, जो तिरुपति की परंपरा के समान है.
•यहां चढ़ावे की अनूठी परंपरा है: वीरभद्र स्वामी को शाकाहारी भोग और देवी भद्रकाली को मांसाहारी (मुर्गा, शराब) चढ़ावा चढ़ाया जाता है, जो स्थानीय जनजातीय आस्था को दर्शाता है.
•महाशिवरात्रि पर 15 लाख भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है; यह मेडाराम जतारा के बाद गिरिजन और आदिवासी समुदायों के लिए दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ स्थल है.