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जानें ऋषि मनु ने परपुरुष से संतान पैदा करने की नियोग प्रथा को क्यों समाप्त किया और इसे अनुचित क्यों ठहराया.
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ऋषि मनु ने क्यों खत्म कराई नियोग प्रथा? इसे 'पशुधर्म' क्यों कहा.
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News18
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27-02-2026, 14:21
ऋषि मनु ने क्यों खत्म कराई नियोग प्रथा? इसे 'पशुधर्म' क्यों कहा.
•
महाभारत काल में नियोग प्रथा प्रचलित थी, जिसमें निःसंतान या विधवा महिलाएं दूसरे पुरुष से संतान उत्पन्न कर सकती थीं.
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महाभारत काल के बाद नैतिक मूल्यों में गिरावट और प्रथा के दुरुपयोग के कारण ऋषि मनु ने इसे समाप्त कर दिया.
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मनु ने नियोग को 'पशुधर्म' कहकर इसकी आलोचना की और इसे मानवीय गरिमा के विरुद्ध बताया.
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मनु का मानना था कि विवाह के बाद स्त्री को केवल अपने पति के प्रति वफादार रहना चाहिए और विधवाओं के लिए ब्रह्मचर्य का समर्थन किया.
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मनुस्मृति के रचयिता मनु के कड़े रुख के कारण नियोग प्रथा उत्तर-वैदिक काल के बाद भारतीय समाज से लगभग समाप्त हो गई.
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