
व्यभिचार का गैर-आपराधीकरण वैवाहिक निष्ठा को सीधे प्रभावित नहीं करता है, बल्कि यह विवाहेतर संबंधों के प्रति कानूनी दृष्टिकोण को बदल देता है।
पत्नियों को पति के लिव-इन रिलेशनशिप के खिलाफ कोई कानूनी सहारा नहीं है, क्योंकि इसे अपराध नहीं माना जाता है।
प्रदान किए गए स्रोत सीधे तौर पर यह नहीं बताते हैं कि क्या इस फैसले से भारतीय समाज में अधिक वैवाहिक संबंध विच्छेद होंगे।