मकर संक्रांति: समस्तीपुर के दशहरा गांव का 'तिलवा' बना पहचान, परिवारों की मिठास से घुली परंपरा.

जीवनशैली
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News18•11-01-2026, 18:15
मकर संक्रांति: समस्तीपुर के दशहरा गांव का 'तिलवा' बना पहचान, परिवारों की मिठास से घुली परंपरा.
- •समस्तीपुर के मोहनपुर ब्लॉक का दशहरा गांव अपने पारंपरिक 'तिलवा' के लिए प्रसिद्ध है, जो तिल और चीनी से बनता है.
- •तिलवा बनाना एक पैतृक पारिवारिक व्यवसाय है, जिसमें कई परिवार पीढ़ियों से लगे हुए हैं.
- •पारंपरिक प्रक्रिया में चीनी को 'पाग' में पकाना, पत्थर पर ठंडा करना, गूंधना, काटना और भुने हुए तिल से लेपित करना शामिल है.
- •मकर संक्रांति (14 जनवरी) से पहले 1 जनवरी से 13 जनवरी तक काम तेज हो जाता है.
- •तिलवा लगभग 80 रुपये प्रति किलोग्राम बिकता है, प्रतिदिन दो क्विंटल से अधिक की बिक्री होती है, जिससे कई परिवारों की आजीविका चलती है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: दशहरा गांव का पारंपरिक तिलवा व्यवसाय संस्कृति को संरक्षित करता है और आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत है.
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