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गाजीपुर का 'होरहा': पारंपरिक स्वाद, स्वास्थ्य और विरासत की अनूठी गाथा
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ना ओवन, ना शेफ: पिज्जा-बर्गर के दौर में जिंदा है 'होरहा' की परंपरा.
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News18
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23-03-2026, 14:17
ना ओवन, ना शेफ: पिज्जा-बर्गर के दौर में जिंदा है 'होरहा' की परंपरा.
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गाजीपुर में पिज्जा-बर्गर के युग में भी 'होरहा' की परंपरा जीवित है, जिसका स्वाद फाइव-स्टार डिश को मात दे सकता है.
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होरहा सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सामुदायिक प्रेम का भी प्रतीक है, जिसे 'ओपन-फायर रोस्टिंग' कला से बनाया जाता है.
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विनीत तिवारी बताते हैं कि बांस की छड़ी पर चने के पौधे फैलाकर, सूखी पत्तियों से आग जलाकर इसे भूना जाता है.
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शोध के अनुसार, आग में चने भूनने से उनके एंटी-न्यूट्रिशनल कारक कम होते हैं और प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ती है, जिससे स्मोकी फ्लेवर आता है.
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यह ग्रामीण भारत में 'होरहा', 'हुरदा' या 'बोदिया' के नाम से जाना जाता है और रबी फसल के दौरान सामुदायिक जुड़ाव का एक प्रमुख साधन है.
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