सीतामढ़ी के अरुण शाह: पांच दशकों से परोस रहे GI टैग सिलाव खाजा का स्वाद.

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News18•23-02-2026, 11:47
सीतामढ़ी के अरुण शाह: पांच दशकों से परोस रहे GI टैग सिलाव खाजा का स्वाद.
- •अरुण शाह सीतामढ़ी में 4-5 दशकों से 10 परतों वाला, चाशनी में डूबा सिलाव खाजा बेच रहे हैं.
- •स्थानीय रूप से “खजली मिठाई” या “सिलाव खाजा” के नाम से जाना जाने वाला यह बिहार की एक प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाई है, जो अपनी परतदार बनावट और कुरकुरे स्वाद के लिए पहचानी जाती है.
- •यह मिठाई सिंघाड़े के आटे, मैदा और चीनी से बनाई जाती है, जिसकी अनूठी परतदार संरचना प्राप्त करने में 2-3 घंटे लगते हैं.
- •बढ़ती लागत और प्रतिस्पर्धा के बावजूद, अरुण शाह प्रतिदिन 100-200 पीस बेचते हैं, जिससे मिठाई का पारंपरिक स्वाद बरकरार है.
- •स्थानीय लोग उनके हाथ से बने सिलाव खाजा को एक अनूठा स्वाद मानते हैं, जो आधी सदी की कड़ी मेहनत और परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है.
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