फाग गीतों के बिना अधूरी होली, छतरपुर में सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम.

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News18•03-03-2026, 14:16
फाग गीतों के बिना अधूरी होली, छतरपुर में सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम.
- •छतरपुर में होली का त्योहार पारंपरिक फाग गीतों के बिना अधूरा माना जाता है, यह एक सदियों पुरानी परंपरा है.
- •शहरों में डीजे संगीत पर नाचने के बजाय, छतरपुर के लोग ढोलक और मंजीरा की धुन पर झूमते हैं.
- •खजुराहो के कदारी गांव के दरबारी लाल दुबे 15 साल की उम्र से फाग गीत गा रहे हैं, उन्होंने अभ्यास से सीखा है.
- •छतरपुर जिले में चार मुख्य प्रकार के फाग गीत गाए जाते हैं: झूलादार, चौकड़िया, छंददार और दौरुआ फाग, सभी की धुनें अलग हैं.
- •फागुन के पूरे महीने गांव के चौपालों और मंदिरों में फाग की अनूठी महफिलें सजती हैं, जहां रंग, गुलाल और अबीर उड़ते हैं.
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