कुमाऊंनी विरासत की अनूठी झलक: ढोलक-मंजीरे की थाप पर थिरकीं महिलाएं, नैनीताल होली में डूबा.

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News18•21-02-2026, 15:01
कुमाऊंनी विरासत की अनूठी झलक: ढोलक-मंजीरे की थाप पर थिरकीं महिलाएं, नैनीताल होली में डूबा.
- •नैनीताल में महिलाओं की 'बैठकी होली' संगीत, भक्ति और सामुदायिक आनंद का एक अनूठा उत्सव है, जो रंग पड़नी एकादशी से लगभग पंद्रह दिन पहले शुरू होता है.
- •महिलाएं पारंपरिक कुमाऊंनी वेशभूषा में इकट्ठा होती हैं, राधा-कृष्ण-थीम वाली होलियां गाती हैं और ढोलक व मंजीरे की थाप पर नृत्य करती हैं.
- •मल्लीताल में "नारी सेवा समिति" जैसे संगठन इस सांस्कृतिक परंपरा को संरक्षित करते हैं, घंटों तक होली के रंगों में बातचीत और डूबने को बढ़ावा देते हैं.
- •यह त्योहार व्यंजनों का भी आनंद है, जिसमें गुजिया, कचौरी, आलू के गुटके और भांग की चटनी जैसे पारंपरिक व्यंजन शामिल हैं.
- •बैठकी होली शास्त्रीय संगीत को दर्शाती है जिसमें राग-आधारित कुमाऊंनी होलियां होती हैं, जो पीढ़ियों से सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा देती हैं.
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