खजुराहो में राजस्थानी भवाई और कालबेलिया नृत्य ने दर्शकों का मन मोहा

छतरपुर
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News18•19-01-2026, 19:58
खजुराहो में राजस्थानी भवाई और कालबेलिया नृत्य ने दर्शकों का मन मोहा
- •खजुराहो के आदिवासी कला संग्रहालय में आदिमार्ट फाउंडेशन दिवस समारोह में राजस्थान के भवाई और कालबेलिया नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
- •जोधपुर से आए पूर्ण नाथ कालबेलिया के नेतृत्व में टीम ने बीन, डब और ढोल जैसे वाद्ययंत्रों के साथ पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए.
- •भवाई नृत्य एक स्टंट-आधारित लोक नृत्य है जिसमें कलाकार सिर पर कई बर्तन संतुलित करते हुए कांच, तलवारों या प्लेटों के किनारों पर प्रदर्शन करते हैं.
- •कालबेलिया नृत्य, जिसे 'सपेरा नृत्य' भी कहा जाता है, सपेरा समुदाय की महिलाओं द्वारा सांप जैसी लचीली, घूमती हुई हरकतों के साथ किया जाता है.
- •कालबेलिया नृत्य को यूनेस्को द्वारा 2010 में अपनी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया था.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: राजस्थान के भवाई और यूनेस्को-मान्यता प्राप्त कालबेलिया नृत्यों ने खजुराहो में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
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