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Moneycontrol26-01-2026, 16:40

मनी बिल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला लंबित: स्पीकर की शक्ति पर न्यायिक समीक्षा

  • 2018 के आधार मामले में, आधार अधिनियम को मनी बिल के रूप में पारित करने पर सुप्रीम कोर्ट में विरोधाभासी विचार थे.
  • न्यायमूर्ति अशोक भूषण (बहुमत) ने इसे बरकरार रखा, यह तर्क देते हुए कि अधिनियम का उद्देश्य भारत की संचित निधि से राज्य सब्सिडी को वित्तपोषित करना है.
  • न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ (असहमति) ने तर्क दिया कि अधिनियम अनुच्छेद 110(1) के दायरे से बाहर था, जिससे मनी बिल के रूप में इसका पारित होना असंवैधानिक हो गया.
  • किसी विधेयक की मनी बिल स्थिति पर स्पीकर का निर्णय अनुच्छेद 110(3) के तहत 'अंतिम' होता है, लेकिन यह अंतिम निर्णय न्यायिक समीक्षा से प्रतिरक्षित नहीं है.
  • एक सात-न्यायाधीशों की संविधान पीठ जल्द ही इस व्यापक प्रश्न पर निर्णय देगी कि किन विधेयकों को वैध रूप से मनी बिल के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सुप्रीम कोर्ट जल्द ही मनी बिल के दायरे और स्पीकर की शक्ति को स्पष्ट करेगा, जिससे भविष्य के कानून प्रभावित होंगे.

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