मुर्शिदाबाद में टोटो के दबदबे से पारंपरिक हाथ रिक्शा गायब; विरासत खतरे में.

दक्षिण बंगाल
N
News18•31-12-2025, 13:29
मुर्शिदाबाद में टोटो के दबदबे से पारंपरिक हाथ रिक्शा गायब; विरासत खतरे में.
- •पश्चिम बंगाल, खासकर मुर्शिदाबाद में, बैटरी से चलने वाले टोटो और ई-रिक्शा के बढ़ते प्रभुत्व के कारण पारंपरिक हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शा तेजी से गायब हो रहे हैं.
- •कभी आम रहे इन रिक्शाओं की संख्या मुर्शिदाबाद में 60-70 से घटकर केवल 4-5 रह गई है, और दैनिक आय 500 रुपये से घटकर 100-300 रुपये हो गई है.
- •आधुनिक जीवन की तेज गति और त्वरित परिवहन की प्राथमिकता ने मांग को ई-रिक्शा की ओर मोड़ दिया है, जिससे हाथ रिक्शा को बहुत कम किराया मिल रहा है.
- •कई चालक, अक्सर बुजुर्ग, परंपरा को बनाए रखने के लिए इन शारीरिक रूप से थकाऊ रिक्शाओं को कम आय और खोई हुई प्रतिष्ठा के बावजूद चलाना जारी रखे हुए हैं.
- •कभी अभिजात वर्ग का प्रतीक रहे हाथ रिक्शा अब विलुप्त होने की कगार पर हैं, जो तकनीकी प्रगति और बदलती सार्वजनिक धारणा के बीच जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मुर्शिदाबाद में हाथ रिक्शा विलुप्त होने की कगार पर हैं, आधुनिक ई-रिक्शा और कम आय से विरासत खतरे में है.
✦
More like this
Loading more articles...





