बागेश्वर की पारंपरिक होली: हुड़का, तबले की थाप पर झूमता था गांव, 7 दिन का उत्सव.

N
News18•04-03-2026, 10:07
बागेश्वर की पारंपरिक होली: हुड़का, तबले की थाप पर झूमता था गांव, 7 दिन का उत्सव.
- •स्थानीय विशेषज्ञ संदीप उपाध्याय के अनुसार, बागेश्वर में पारंपरिक होली 7-8 दिनों तक चलने वाला सांस्कृतिक उत्सव था, न कि आज की तरह एक दिवसीय आयोजन.
- •होली के गीत हुड़का, हारमोनियम और तबले जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर गाए जाते थे, डीजे या लाउड म्यूजिक सिस्टम का उपयोग नहीं होता था.
- •बैठकी होली में रागों का गायन और खड़ी होली में गोलाकार नृत्य होता था, जिसमें देवी-देवताओं, ऋतुओं और सामाजिक जीवन की झलक मिलती थी.
- •गुजिया की जगह गुड़/सूजी का हलवा, मसालेदार आलू, भांग की चटनी और मंडुआ की रोटी जैसे पारंपरिक व्यंजन घर पर बनाए जाते थे.
- •प्रवासी ग्रामीण होली पर लौटते थे, और पूरा गांव अलाव के चारों ओर बैठकर एक साथ त्योहार मनाता था, जिससे सामुदायिक भावना मजबूत होती थी.
✦
More like this
Loading more articles...





