उत्तराखंड में बसंत पंचमी पर नाक-कान छेदन: जानिए इस शुभ दिन की अनोखी परंपरा

पिथौरागढ़
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News18•22-01-2026, 15:45
उत्तराखंड में बसंत पंचमी पर नाक-कान छेदन: जानिए इस शुभ दिन की अनोखी परंपरा
- •उत्तराखंड में बसंत पंचमी पर नाक और कान छेदन की एक अनोखी परंपरा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है.
- •यह अनुष्ठान छोटे बच्चों पर किया जाता है, बसंत पंचमी को ज्ञान, पवित्रता और नई शुरुआत का प्रतीक होने के कारण सबसे शुभ दिन माना जाता है.
- •हिंदू धर्म के अनुसार, नाक और कान छेदन केवल आभूषण पहनने के लिए नहीं, बल्कि आवश्यक धार्मिक अनुष्ठान हैं; लड़कियों के लिए नाक और लड़कों के लिए जनेऊ संस्कार से पहले कान छेदन होता है.
- •स्थानीय विशेषज्ञ राम सिंह बताते हैं कि यह परंपरा शरीर और मन को शुद्ध करती है, और बसंत पंचमी पर इसे करने से देवी सरस्वती की कृपा से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होता है.
- •गरुड़ पुराण के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के नाक और कान नहीं छेदे जाते हैं, तो मृत्यु के बाद यमराज के दूत जबरन उनके नाक और कान छेदते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: उत्तराखंड में बसंत पंचमी पर नाक और कान छेदन की परंपरा शुभ शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण है.
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