मायके से ससुराल जाते समय चावल से देहली पूजती बेटी
पिथौरागढ़
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News1803-02-2026, 12:30

बेटी की विदाई पर चावल से दहलीज पूजने की पहाड़ी परंपरा: जानें इसका भावनात्मक महत्व.

  • पहाड़ों में बेटी की विदाई पर चावल से दहलीज पूजने की एक भावनात्मक परंपरा प्रचलित है.
  • बेटी के माथे पर 'पीठ्या' (तिलक) लगाकर आशीर्वाद दिया जाता है, ताकि वह जहां भी जाए, खुश और सुरक्षित रहे.
  • दहलीज को पवित्र माना जाता है, जहां से खुशियां घर में आती हैं और प्रियजन विदा होते हैं.
  • चावल से दहलीज पूजने का अर्थ है कि मायके की लक्ष्मी घर में बनी रहे और घर में सुख-शांति-समृद्धि बनी रहे.
  • यह परंपरा दर्शाती है कि बेटी का रिश्ता मायके से कभी नहीं टूटता, उसका प्यार और आशीर्वाद हमेशा दहलीज से जुड़ा रहता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बेटी की विदाई पर चावल से दहलीज पूजना पहाड़ों की एक भावनात्मक परंपरा है, जो आशीर्वाद और अटूट रिश्ते का प्रतीक है.

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