बेटी की विदाई पर चावल से दहलीज पूजने की पहाड़ी परंपरा: जानें इसका भावनात्मक महत्व.

पिथौरागढ़
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News18•03-02-2026, 12:30
बेटी की विदाई पर चावल से दहलीज पूजने की पहाड़ी परंपरा: जानें इसका भावनात्मक महत्व.
- •पहाड़ों में बेटी की विदाई पर चावल से दहलीज पूजने की एक भावनात्मक परंपरा प्रचलित है.
- •बेटी के माथे पर 'पीठ्या' (तिलक) लगाकर आशीर्वाद दिया जाता है, ताकि वह जहां भी जाए, खुश और सुरक्षित रहे.
- •दहलीज को पवित्र माना जाता है, जहां से खुशियां घर में आती हैं और प्रियजन विदा होते हैं.
- •चावल से दहलीज पूजने का अर्थ है कि मायके की लक्ष्मी घर में बनी रहे और घर में सुख-शांति-समृद्धि बनी रहे.
- •यह परंपरा दर्शाती है कि बेटी का रिश्ता मायके से कभी नहीं टूटता, उसका प्यार और आशीर्वाद हमेशा दहलीज से जुड़ा रहता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बेटी की विदाई पर चावल से दहलीज पूजना पहाड़ों की एक भावनात्मक परंपरा है, जो आशीर्वाद और अटूट रिश्ते का प्रतीक है.
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