अपर हिमालय की अनोखी होली: न गुलाल, न शोर, सिर्फ 'लाल टीके' से सदियों पुरानी परंपरा.
अपर हिमालय की अनोखी होली: न गुलाल, न शोर, सिर्फ 'लाल टीके' से सदियों पुरानी परंपरा.
- •अपर हिमालय (पिथौरागढ़) में होली रंगों और शोर के बजाय आस्था और परंपरा से मनाई जाती है.
- •यहां सदियों से केवल लाल टीका लगाकर होली मनाने की परंपरा है, जिसे देवताओं को प्रिय माना जाता है.
- •ग्रामीण सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं, मंदिर में गांव की समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं, फिर लाल टीका लगाकर बधाई देते हैं.
- •धन सिंह धामी जैसे बुजुर्ग रिश्तों और परंपरा को रंगों से अधिक महत्व देते हैं, इसे सच्ची खुशी मानते हैं.
- •नई पीढ़ी भी इस सरल, भक्तिपूर्ण और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध उत्सव को सहेज रही है.