यमन में सऊदी-UAE प्रतिद्वंद्विता बढ़ी, पश्चिम एशिया की स्थिरता खतरे में.

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Firstpost•04-01-2026, 15:13
यमन में सऊदी-UAE प्रतिद्वंद्विता बढ़ी, पश्चिम एशिया की स्थिरता खतरे में.
- •यमन में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच प्रतिद्वंद्विता सैन्य टकराव में बदल गई है, जिसमें 30 दिसंबर, 2025 को मुकल्ला बंदरगाह पर सऊदी हवाई हमला शामिल है, जिसमें STC को UAE के कथित हथियार शिपमेंट को निशाना बनाया गया.
- •यह संघर्ष क्षेत्रीय प्रभाव, बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों पर नियंत्रण और यमन के रणनीतिक बंदरगाहों व हद्रामौत जैसे संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों में आर्थिक हितों की तलाश से उपजा है.
- •UAE दक्षिणी यमन में STC की स्वायत्तता का समर्थन करता है ताकि समुद्री नियंत्रण सुरक्षित हो सके, जबकि सऊदी अरब एक एकीकृत यमन और अपनी सीमा सुरक्षा के लिए प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) का समर्थन करता है.
- •हालिया घटनाक्रमों में PLC द्वारा UAE के साथ रक्षा समझौते को रद्द करना और सऊदी अरब द्वारा UAE सेना को यमन से हटने का अल्टीमेटम देना शामिल है, जिससे यमनी सरकार और खंडित हो गई है.
- •यह बढ़ती प्रतिद्वंद्विता हाउथी बलों को मजबूत करने, यमन की अस्थिरता को गहरा करने और महत्वपूर्ण लाल सागर व्यापार को खतरे में डालने का जोखिम उठाती है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में नाजुकता बढ़ जाती है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: यमन में सऊदी-UAE प्रतिद्वंद्विता अस्थिरता बढ़ाती है, व्यापार को खतरे में डालती है और हाउथी को मजबूत करती है, जिससे पश्चिम एशिया की नाजुकता गहरी होती है.
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