शादी के बाद भी बेटी को पिता की संपत्ति में बराबर का हक: कानून क्या कहता है?

पर्सनल फाइनेंस
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CNBC Awaaz•03-01-2026, 08:16
शादी के बाद भी बेटी को पिता की संपत्ति में बराबर का हक: कानून क्या कहता है?
- •हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के संशोधन ने बेटियों को बेटों के समान पैतृक संपत्ति में अधिकार दिए, चाहे वे विवाहित हों या अविवाहित.
- •संपत्ति में हिस्सा पाने के लिए बेटी का 9 सितंबर 2005 को जीवित होना अनिवार्य है, जब संशोधित प्रावधान लागू हुए थे.
- •पिता का उस तारीख को जीवित होना आवश्यक नहीं है, क्योंकि बेटी जन्म से ही सहदायिक बन जाती है.
- •पैतृक संपत्ति का बंटवारा आमतौर पर मां, बेटे और बेटी के बीच बराबर होता है, लेकिन सभी की सहमति से असमान बंटवारा भी संभव है.
- •आयकर विभाग द्वारा मान्यता के लिए, बंटवारा पूर्ण होना चाहिए और क्षेत्राधिकार आयकर अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाना चाहिए.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: 2005 के संशोधन के बाद, बेटियों को शादी के बाद भी पैतृक संपत्ति में बेटों के समान अधिकार हैं.
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