जब राजा राजा चोल ने अपनी नौसेना को मजबूत करने का फैसला किया तो उन्होंने एक अलग रास्ता चुना. उन्होंने समझा कि जो लोग समुद्र में लूट सकते हैं, वे समुद्र में युद्ध भी जीत सकते हैं. कहा जाता है कि एक अभियान के दौरान चोल जहाजों ने इस लुटेरे के बेड़े को घेर लिया. भयंकर लड़ाई हुई, लुटेरे ने बहादुरी से मुकाबला किया. लेकिन अंत में हार गया. उस समय सबको लगा कि अब उसका अंत तय है. लेकिन राजा राजा चोल ने उसे मारने की बजाय अपने सामने बुलाया.
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News1805-03-2026, 15:02

राजराजा चोल का 'ब्रह्मास्त्र': समुद्री लुटेरा बना नौसेना का कमांडर, श्रीलंका से इंडोनेशिया तक तबाही.

  • राजराजा चोल ने एक कुख्यात समुद्री लुटेरे 'कदल कोट्ट्रवन' को अपनी नौसेना का दुर्जेय कमांडर बनाया.
  • पुडुचेरी और नागपट्टिनम के तटों के पास सक्रिय 'कदल कोट्ट्रवन' के पास तेज जहाज (मरक्कलम, टोनी) थे और वह समुद्री युद्ध में कुशल था.
  • चोल ने उसे हराने के बाद मारने के बजाय अपनी नौसेना में शामिल होने का प्रस्ताव दिया, जिससे उसकी विशेषज्ञता का साम्राज्य के लिए लाभ उठाया जा सके.
  • पूर्व लुटेरे की रणनीतियाँ 993 ईस्वी में श्रीलंका के खिलाफ चोल अभियान में महत्वपूर्ण साबित हुईं, जिससे राजा महिंदा V से उत्तरी श्रीलंका पर कब्जा कर लिया गया.
  • उसकी नौसैनिक रणनीति ने राजेंद्र चोल के अधीन 1025 ईस्वी में श्रीविजय साम्राज्य (इंडोनेशिया, मलय द्वीप) के खिलाफ अभियान में भी योगदान दिया, जिससे चोल का प्रभाव दक्षिण पूर्व एशिया तक फैल गया.

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