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लोकपर्व 'फूलदेई' पर बच्चों ने घर-घर मांगी खुशहाली, बुरांश-फ्योंली की खुशबू से महके पहाड़
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उत्तराखंड में लोकपर्व 'फूलदेई' की धूम: बच्चे घर-घर बांट रहे खुशहाली.
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News18
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15-03-2026, 12:38
उत्तराखंड में लोकपर्व 'फूलदेई' की धूम: बच्चे घर-घर बांट रहे खुशहाली.
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उत्तराखंड का लोकपर्व 'फूलदेई' चैत्र माह के पहले दिन (14 या 15 मार्च) प्रकृति के प्रति आभार और प्रेम का उत्सव है, जिसे बच्चे मनाते हैं.
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बच्चे बुरांश, फ्योंली जैसे रंग-बिरंगे फूल इकट्ठा कर घर-घर जाकर दहलीज पर चढ़ाते हैं और खुशहाली की कामना करते हैं.
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'फूलदेई छम्मा देई...' जैसे पारंपरिक लोकगीत गाते हुए बच्चे घर-घर जाते हैं, जहां उन्हें दाल, चावल, गुड़, घी और दक्षिणा मिलती है.
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बच्चों द्वारा जमा किए गए चावल से 'साई' नामक विशेष प्रसाद बनता है, जिसे गांव में बांटा जाता है.
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यह त्योहार कुमाऊं और गढ़वाल में कई दिनों तक (कुछ जगह 8 दिन, टिहरी में एक माह तक) मनाया जाता है, जो प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है.
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