मद्रास हाई कोर्ट: लिव-इन पार्टनर को सुरक्षा के लिए 'पत्नी' का दर्जा मिलना चाहिए

भारत
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News18•21-01-2026, 15:42
मद्रास हाई कोर्ट: लिव-इन पार्टनर को सुरक्षा के लिए 'पत्नी' का दर्जा मिलना चाहिए
- •मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को कानूनी सुरक्षा के लिए 'पत्नी' का दर्जा दिया जाना चाहिए, खासकर जब शादी के वादे के बाद रिश्ते टूट जाते हैं.
- •मदुरै बेंच की न्यायमूर्ति एस. श्रीमथी ने शादी के झूठे वादे पर यौन संबंध बनाने के आरोपी व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की.
- •अदालत ने लिव-इन रिलेशनशिप को गांधर्व विवाह के समान बताया और बदलते सामाजिक परिवेश में कमजोर महिलाओं की सुरक्षा के लिए न्यायपालिका के कर्तव्य पर जोर दिया.
- •भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69, जो शादी के झूठे वादों जैसे धोखे से प्राप्त यौन संबंध को अपराधी बनाती है, को ऐसे मामलों में लागू होने योग्य बताया गया.
- •अदालत ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप आधुनिकता का प्रतीक होने के बावजूद पारंपरिक मानदंडों के लिए 'सांस्कृतिक झटका' हैं और महिलाओं को कानूनी सुरक्षा के बिना छोड़ देते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मद्रास हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं को पत्नी के समान कानूनी सुरक्षा देने की वकालत की.
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