भारत के 10 भूले हुए शीतकालीन व्यंजन: लहसुन की खीर से होख स्यून तक, फिर से खोजें मौसमी स्वाद

जीवनशैली
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Moneycontrol•20-01-2026, 13:58
भारत के 10 भूले हुए शीतकालीन व्यंजन: लहसुन की खीर से होख स्यून तक, फिर से खोजें मौसमी स्वाद
- •भारत का पारंपरिक शीतकालीन व्यंजन, जो कभी दैनिक जीवन का अभिन्न अंग था, मौसमी सामग्री और शरीर को गर्म रखने वाले गुणों पर केंद्रित था, लेकिन अब आधुनिक जीवनशैली के कारण काफी हद तक भुला दिया गया है.
- •गोंद के लड्डू और पंजीरी जैसे व्यंजन सिर्फ स्वादिष्ट नहीं बल्कि पौष्टिक भी थे, जिनमें ऊर्जा और गर्मी बढ़ाने के लिए गोंद, सूखे मेवे और जड़ी-बूटियाँ शामिल थीं.
- •क्षेत्रीय विशिष्टताओं में ठंड के लिए लहसुन की खीर (राजस्थान), गन्ने के रस से बने गन्ने वाला चावल (पंजाब/हरियाणा), और मोरेल मशरूम के साथ शुफ्ता कनागुच्छी (कश्मीर) शामिल हैं.
- •अन्य अद्वितीय शीतकालीन खाद्य पदार्थों में हरीसा (कश्मीर), एक धीमी गति से पकाया गया मटन दलिया; रतालाच्या घाऱ्या (महाराष्ट्र), शकरकंद की मीठी पूरियां; और राब (गुजरात/राजस्थान), एक औषधीय बाजरे का दलिया शामिल हैं.
- •लेख बाजरा, सरसों का साग जैसी मौसमी हरी सब्जियों और दौलत की चाट व माखन मलाई जैसी क्षणभंगुर शीतकालीन मिठाइयों के महत्व पर प्रकाश डालता है, जो मौसम के अनुसार खाने पर जोर देता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारत के भूले हुए शीतकालीन व्यंजनों को फिर से खोजें जो गर्माहट, पोषण और पारंपरिक मौसमी भोजन से जुड़ाव प्रदान करते हैं.
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