From fields to kitchens, everyday staples quietly sustain India’s food security and democratic strength.
जीवनशैली
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News1825-01-2026, 22:59

डाइनिंग टेबल पर लोकतंत्र: कैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों ने भारत की प्रगति को आकार दिया.

  • भारत की लोकतांत्रिक यात्रा केवल राजनीतिक संस्थानों तक सीमित नहीं, बल्कि कृषि और रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों से भी गहराई से जुड़ी है.
  • खाद्य सुरक्षा ने स्थिरता, गरिमा प्रदान की और नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सार्थक रूप से भाग लेने में सक्षम बनाया.
  • केआरबीएल लिमिटेड के कुणाल शर्मा ने जोर दिया कि कृषि प्रगति ने किसानों की आर्थिक आवाज को मजबूत किया और एक लचीला खाद्य पारिस्थितिकी तंत्र बनाया.
  • गणेश कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के मनीष मिमानी ने स्वतंत्रता के बाद से भारतीय घरों की 'शांत रीढ़' के रूप में आटा, मैदा, सूजी और बेसन जैसे मुख्य खाद्य पदार्थों पर प्रकाश डाला.
  • विश्वसनीय, उच्च गुणवत्ता वाले और किफायती मुख्य खाद्य पदार्थों तक पहुंच एक लोकतांत्रिक आवश्यकता है, जो राष्ट्रीय कल्याण और नागरिक योगदान सुनिश्चित करती है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों ने चुपचाप लेकिन मौलिक रूप से भारत की लोकतांत्रिक प्रगति और राष्ट्रीय स्थिरता को आकार दिया है.

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