बंगाल-ओडिशा सीमांत गांव: विभाजन नहीं, सह-अस्तित्व की अनूठी कहानी

जीवनशैली
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News18•20-01-2026, 14:21
बंगाल-ओडिशा सीमांत गांव: विभाजन नहीं, सह-अस्तित्व की अनूठी कहानी
- •पश्चिम मेदिनीपुर के दांतन के पास बंगाल-ओडिशा सीमा पर स्थित गांवों में संस्कृति और जीवनशैली का सहज मिश्रण दिखता है.
- •निवासी अक्सर एक राज्य में रहते हैं लेकिन दूसरे में कृषि भूमि के मालिक होते हैं, खेती के लिए रोजाना सीमा पार करते हैं.
- •सुवर्णरेखा नदी एक प्राकृतिक सीमा बनाती है, जिसमें बैपट्ना, सोनाकोनिया, सोलपट्टा और मातिबिरुआ जैसे गांव बंगाल के किनारे पर स्थित हैं.
- •ऐतिहासिक रूप से, दांतन पुलिस स्टेशन क्षेत्र ओडिशा का हिस्सा था, जिसने प्रशासनिक विभाजन के बावजूद गहरे संबंध बनाए रखे हैं.
- •सीमा को बाधा के रूप में नहीं, बल्कि साझा जीवन और आपसी निर्भरता के सदियों के प्रमाण के रूप में देखा जाता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बंगाल-ओडिशा सीमा के गांव सह-अस्तित्व का उदाहरण हैं, जहां साझा संस्कृति और दैनिक जीवन में प्रशासनिक रेखाएं धुंधली हो जाती हैं.
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