पहाड़ी घर में रखा पारंपरिक “माना”, जिससे आज भी चावल नापकर भात बनाया जाता है
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News1827-02-2026, 20:37

पहाड़ी बर्तन 'माना': पूर्वजों की अनमोल निशानी, सिखाता है अन्न का सम्मान.

  • पहाड़ों में 'माना' नामक एक विशेष पीतल (तांबे) का बर्तन चावल मापने के लिए उपयोग किया जाता है, जो सटीक मात्रा सुनिश्चित करता है और भोजन की बर्बादी रोकता है.
  • इसका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी है, मंदिरों में चावल चढ़ाने और दान देने के लिए इसका उपयोग होता है.
  • परिवार के सदस्यों की संख्या के अनुसार चावल मापने के लिए माना का उपयोग करते हैं, जिससे संतुलित भोजन और मितव्ययिता को बढ़ावा मिलता है.
  • माना को पूर्वजों की अनमोल विरासत के रूप में संरक्षित किया जाता है, जो बड़ों और प्राचीन परंपराओं का प्रतीक है.
  • आधुनिक माप उपकरणों के बावजूद, माना पहाड़ों में सादगी, परंपरा और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रतीक बना हुआ है.

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