तांबे के बर्तनों की खासियत 
बागेश्वर
N
News1826-01-2026, 20:27

बागेश्वर के टम्टा परिवार ने ताम्र कला को रखा जीवित, सीएम धामी ने किया सम्मानित.

  • बागेश्वर के खरेही क्षेत्र के टम्टा परिवार, जिसमें मुकेश, अंकित और अशोक कुमार टम्टा शामिल हैं, उत्तराखंड की पारंपरिक धातु कला को जीवित रखे हुए हैं.
  • इन कुशल कारीगरों द्वारा हस्तनिर्मित तांबे का घड़ा (गागर) हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेंट किया गया, जिससे उनकी कला को पहचान मिली.
  • टम्टा परिवार पीढ़ियों से तांबे के बर्तन बनाने के काम में लगा हुआ है, पारंपरिक औजारों का उपयोग करके पानी के बर्तन, थालियां और अन्य बर्तन बनाते हैं.
  • तांबे का बर्तन बनाने की प्रक्रिया श्रमसाध्य है, जिसमें तांबे की चादरों को हथौड़ों से आकार देना, हिस्सों को जोड़ना और पॉलिश करना शामिल है, एक बर्तन बनाने में कई दिन लगते हैं.
  • तांबे के बर्तन पहाड़ी क्षेत्रों में पूजा और स्वास्थ्य के लिए सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन आधुनिक सामग्रियों से चुनौती का सामना कर रहे हैं; कारीगर बाजार पहुंच और प्रशिक्षण के लिए सरकारी सहायता चाहते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बागेश्वर का टम्टा परिवार पारंपरिक ताम्र कला को समर्पित रूप से संरक्षित कर रहा है, जिसे पहचान मिल रही है और पुनरुद्धार के लिए समर्थन की तलाश है.

More like this

Loading more articles...