गुजरात हाई कोर्ट का फैसला: प्याज-लहसुन न खाने पर पत्नी का व्यवहार मानसिक क्रूरता

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Moneycontrol•29-01-2026, 16:57
गुजरात हाई कोर्ट का फैसला: प्याज-लहसुन न खाने पर पत्नी का व्यवहार मानसिक क्रूरता
- •गुजरात हाई कोर्ट ने तलाक के एक फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पत्नी के कठोर धार्मिक रीति-रिवाजों और भोजन को लेकर लगातार झगड़ों को मानसिक क्रूरता माना गया.
- •पति ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक के लिए अर्जी दी थी, जिसमें पत्नी के व्यवहार, धार्मिक कट्टरता और जिद का हवाला दिया गया था.
- •विवाद का एक प्रमुख कारण पत्नी का प्याज-लहसुन न खाने का सख्त नियम था, जिससे परिवार में लगातार तनाव बना रहता था और अलग भोजन बनता था.
- •हाई कोर्ट ने पत्नी की अधिक स्थायी गुजारा भत्ता की अपील खारिज कर दी, जिसमें उसकी नौकरी और पति की सीमित आय व जिम्मेदारियों का उल्लेख किया गया था.
- •गुजारा भत्ता 8,000 रुपये प्रति माह (2013-2020) और उसके बाद 10,000 रुपये निर्धारित किया गया, जिसे फैमिली और हाई कोर्ट दोनों ने उचित माना.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: गुजरात हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पत्नी के कठोर भोजन संबंधी नियम मानसिक क्रूरता हैं, तलाक और गुजारा भत्ता को बरकरार रखा.
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