गुजरात हाई कोर्ट ने 27 नवंबर 2025 को एक अहम फैसले में यह माना कि पत्नी का कठोर धार्मिक व्यवहार और घर के खाने को लेकर लगातार टकराव पति के लिए मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है।
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Moneycontrol29-01-2026, 16:57

गुजरात हाई कोर्ट का फैसला: प्याज-लहसुन न खाने पर पत्नी का व्यवहार मानसिक क्रूरता

  • गुजरात हाई कोर्ट ने तलाक के एक फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पत्नी के कठोर धार्मिक रीति-रिवाजों और भोजन को लेकर लगातार झगड़ों को मानसिक क्रूरता माना गया.
  • पति ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक के लिए अर्जी दी थी, जिसमें पत्नी के व्यवहार, धार्मिक कट्टरता और जिद का हवाला दिया गया था.
  • विवाद का एक प्रमुख कारण पत्नी का प्याज-लहसुन न खाने का सख्त नियम था, जिससे परिवार में लगातार तनाव बना रहता था और अलग भोजन बनता था.
  • हाई कोर्ट ने पत्नी की अधिक स्थायी गुजारा भत्ता की अपील खारिज कर दी, जिसमें उसकी नौकरी और पति की सीमित आय व जिम्मेदारियों का उल्लेख किया गया था.
  • गुजारा भत्ता 8,000 रुपये प्रति माह (2013-2020) और उसके बाद 10,000 रुपये निर्धारित किया गया, जिसे फैमिली और हाई कोर्ट दोनों ने उचित माना.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: गुजरात हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पत्नी के कठोर भोजन संबंधी नियम मानसिक क्रूरता हैं, तलाक और गुजारा भत्ता को बरकरार रखा.

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