इन लड्डुओं की बढ़ती मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन दिनों जिले के लगभग हर चौक-चौराहे पर लोग अन्य काम छोड़कर लड्डू बनाने और बेचने में जुटे हैं. सीवान के दुकानदार सुरेंद्र चौधरी बताते हैं कि वे आमतौर पर समोसा और जलेबी की दुकान चलाते हैं, लेकिन हर साल दिसंबर आते ही लड्डू के इस मौसमी व्यवसाय में लग जाते हैं. मकर संक्रांति के बाद फिर वे अपने पुराने व्यवसाय में लौट जाते हैं.
सीवान
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News1826-12-2025, 20:14

बिहार के पारंपरिक लड्डू: सर्दियों में स्वाद, सेहत और कमाई का संगम.

  • बिहार के तिल, मूंगफली और चिउरा लड्डू मकर संक्रांति और टुसू पर्व जैसे सर्दियों के त्योहारों में अत्यधिक मांग में रहते हैं.
  • ये लड्डू स्वास्थ्य लाभ के लिए महत्वपूर्ण हैं, खासकर किसानों और मजदूरों को सर्दियों में गर्मी और ऊर्जा प्रदान करते हैं.
  • गुड़, तिल, मूंगफली और चावल जैसे साधारण सामग्री से बने ये लड्डू पारंपरिक तरीकों से, अक्सर 'घोंसर' में तैयार किए जाते हैं.
  • सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के अलावा, ये लड्डू स्थानीय विक्रेताओं के लिए मौसमी रोजगार और आय का स्रोत बनते हैं.
  • सीवान के सुरेंद्र चौधरी जैसे दुकानदार अस्थायी रूप से लड्डू बेचने का काम करते हैं, प्रतिदिन दो क्विंटल तक बेचते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बिहार के पारंपरिक सर्दियों के लड्डू एक सांस्कृतिक व्यंजन हैं, जो स्वास्थ्य लाभ और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हैं.

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