नई दिल्‍ली. आज देश में चिनाब लेकर अंजी और पंबन ब्रिज बन चुके हैं, जो अपने आप में अनूठे है और आधुनिक तकनीक की वजह से विश्‍व स्‍तर पर पहचान बना चुके हैं. पर देश में पहले भी ऐसे ब्रिज बने थे, जो उस दौर में खास थे, इनमें कुछ अब भी हैं और कुछ बंद हो चुके हैं. इन ब्रिज के ऊपर से ट्रेन गुजरने का अलग ही अहसास होता है. ऐसी ब्लैक एंड व्हाइट फोटो जो, पहले आपने नहीं देखी होगी.
रेलवे
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News1802-01-2026, 11:28

भारत के ऐतिहासिक रेलवे पुल: दुर्लभ तस्वीरों में अतीत की एक झलक.

  • डफरिन ब्रिज, अब मालवीय ब्रिज (वाराणसी), 1887 में पूरा हुआ एक डबल-डेकर चमत्कार था, जो गंगा नदी पर अपनी तरह का भारत का पहला पुल था, जिसमें 7 बड़े और 18 छोटे स्पैन थे.
  • 1872-73 में निर्मित, रामगंगा ब्रिज (मुरादाबाद) मुरादाबाद जंक्शन और बरेली को जोड़ता है, जो उत्तरी रेलवे के अंतर्गत आता है, जहाँ अब ट्रेनें धीमी गति से गुजरती हैं.
  • भोर घाट रेलवे आर्क ब्रिज (पश्चिमी महाराष्ट्र), 1863 से मुंबई-पुणे लाइन पर चालू है, इसमें एक स्टील आर्क डिज़ाइन है, जो चेनाब ब्रिज की इंजीनियरिंग की याद दिलाता है.
  • दिल्ली का पुराना यमुना ब्रिज, 1867 का एक लोहे का ढाँचा, कोलकाता और दिल्ली के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता था, जो पुराने दिल्ली को शाहदरा से जोड़ता था, अपनी 80 साल की जीवनकाल सीमा पार करने के बावजूद.
  • ये ऐतिहासिक पुल, जो कभी आधुनिक तकनीक से लैस थे, ब्रिटिश राज की महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनमें से कई अब बंद हो चुके हैं या गति प्रतिबंधों के तहत संचालित होते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: दुर्लभ ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें भारत के अग्रणी रेलवे पुलों, अपने युग के इंजीनियरिंग चमत्कारों को उजागर करती हैं.

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