MP हाईकोर्ट का अहम फैसला: पति-पत्नी के बीच यौन संबंध अप्राकृतिक नहीं, धारा 377 रद्द.
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News18•26-03-2026, 18:29
MP हाईकोर्ट का अहम फैसला: पति-पत्नी के बीच यौन संबंध अप्राकृतिक नहीं, धारा 377 रद्द.
•मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पति-पत्नी के बीच यौन संबंध, चाहे किसी भी रूप में हों, अप्राकृतिक यौन कृत्यों (आईपीसी धारा 377) के तहत अपराध नहीं माने जा सकते.
•न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने अपनी पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों को रद्द करने की पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया.
•पत्नी ने अपने पति पर शारीरिक शोषण, जबरन यौन संबंध और दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया था, जिसके कारण आईपीसी की धारा 377 और 498ए के तहत आरोप लगाए गए थे.
•अदालत ने आईपीसी की धारा 375 में 'वैवाहिक बलात्कार अपवाद' का हवाला देते हुए कहा कि पति द्वारा अपनी गैर-नाबालिग पत्नी के साथ किए गए यौन संबंध बलात्कार नहीं माने जाते.
•धारा 377 का आरोप रद्द कर दिया गया, लेकिन पति और ससुराल वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न (498ए) और मारपीट के आरोपों की जांच पर्याप्त सबूतों के कारण जारी रहेगी.