बाघेलखंड का प्राचीन शीतकालीन रहस्य: रहें सुपर एक्टिव, प्राकृतिक रूप से बढ़ाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता

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News18•20-01-2026, 18:16
बाघेलखंड का प्राचीन शीतकालीन रहस्य: रहें सुपर एक्टिव, प्राकृतिक रूप से बढ़ाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता
- •बाघेलखंड की पारंपरिक शीतकालीन दिनचर्या शरीर को मजबूत करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है.
- •योग गुरु महेश आचार्य ने दवाओं के बिना शरीर को गर्म और सक्रिय रखने की दिनचर्या की क्षमता पर प्रकाश डाला.
- •सुबह की रस्मों में हाइड्रेशन और पाचन के लिए गुनगुना पानी (अक्सर नींबू/शहद के साथ) पीना शामिल है.
- •बादाम, अखरोट और किशमिश जैसे सूखे मेवों का सेवन ऊर्जा प्रदान करता है और ठंड से संबंधित बीमारियों से लड़ता है.
- •हल्के स्ट्रेचिंग, सूर्य नमस्कार और अनुलोम-विलोम का अभ्यास रक्त परिसंचरण में सुधार करता है और प्राकृतिक गर्मी उत्पन्न करता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: प्राकृतिक गर्मी, बढ़ी हुई रोग प्रतिरोधक क्षमता और निरंतर ऊर्जा के लिए बाघेलखंड की पारंपरिक शीतकालीन दिनचर्या अपनाएं.
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