होली के बाद मारवाड़ में गूंजते लोकनृत्य: गैर, लूर, चंग, कालबेलिया से सजती रातें.
होली के बाद मारवाड़ में गूंजते लोकनृत्य: गैर, लूर, चंग, कालबेलिया से सजती रातें.
- •होली के बाद मारवाड़ और जालोर क्षेत्रों में गैर, लूर, चंग, कालबेलिया और ढोल जैसे लोकनृत्य सप्तमी तक गांवों को जीवंत करते हैं.
- •पुरुष गैर नृत्य में लकड़ी की छड़ियों और चंग नृत्य में चंग वाद्य यंत्र का उपयोग करते हैं, जबकि महिलाएं लूर, कालबेलिया (सांप जैसी चाल) और ढोल नृत्य करती हैं.
- •ये पारंपरिक प्रदर्शन, फागुन गीतों और रंगीन वेशभूषा के साथ, ग्रामीण जीवन को दर्शाते हुए उत्साह से गांव के चौकों और मेलों को भर देते हैं.