न्याय तक पहुंच लोकतांत्रिक शासन की नींव: सुप्रीम कोर्ट

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News18•03-02-2026, 15:30
न्याय तक पहुंच लोकतांत्रिक शासन की नींव: सुप्रीम कोर्ट
- •सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्याय तक पहुंच लोकतांत्रिक शासन और एक निष्पक्ष समाज की बहुत नींव है.
- •न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और ए एस चंद्रचूड़ की पीठ ने प्रभावी विवाद समाधान के लिए मध्यस्थता कार्यवाही में दक्षता पर जोर दिया.
- •अदालत ने फैसला सुनाया कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 29A(5) के तहत मध्यस्थ के जनादेश के विस्तार के लिए एक आवेदन समय सीमा समाप्त होने और निर्णय दिए जाने के बाद भी स्वीकार्य है.
- •यह फैसला स्पष्ट करता है कि अदालतें धारा 29A(5) के तहत मध्यस्थ के जनादेश को बढ़ा सकती हैं, भले ही वैधानिक 18 महीने की सीमा के बाद निर्णय दिया गया हो.
- •सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि न्यायिक उपचार प्रभावी, निष्पक्ष, सुलभ, किफायती, त्वरित और व्यापक होने चाहिए.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सुप्रीम कोर्ट ने न्याय तक पहुंच को लोकतंत्र की आधारशिला बताया, प्रभावी और सुलभ उपचार सुनिश्चित किया.
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