यूनानी चिकित्सा: अपनी प्रकृति के अनुसार तय करें नींद का पैटर्न, जानें कितनी नींद है जरूरी.

N
News18•11-02-2026, 13:13
यूनानी चिकित्सा: अपनी प्रकृति के अनुसार तय करें नींद का पैटर्न, जानें कितनी नींद है जरूरी.
- •यूनानी चिकित्सा में नींद और जागने के बीच संतुलन बनाए रखना स्वस्थ जीवन का एक मूलभूत सिद्धांत है.
- •नींद शरीर की आंतरिक ऊर्जा 'रूह-ए-हयात' को संरक्षित करती है और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत करती है, पाचन को संतुलित करती है.
- •नींद की कमी से कमजोरी, चिड़चिड़ापन और सोचने की क्षमता में कमी आती है; अत्यधिक जागना शरीर में गर्मी और सूखापन बढ़ाता है.
- •अत्यधिक नींद भी हानिकारक है, यह शरीर में 'बुरुदत' (ठंडक) और 'रुतुबत' (अत्यधिक नमी) बढ़ाती है, जिससे सुस्ती और मोटापा होता है.
- •नींद की आवश्यकता स्वभाव और उम्र के अनुसार भिन्न होती है: बच्चों को अधिक, बुजुर्गों को कम; गर्म स्वभाव वालों को संतुलित नींद चाहिए.
✦
More like this
Loading more articles...





