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इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला: क्या बहू का सास-ससुर की उपेक्षा करना अपराध है?
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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बहू का सास-ससुर की देखभाल न करना 'क्रूरता' नहीं, बेटे की जिम्मेदारी.
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News18
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13-03-2026, 13:29
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बहू का सास-ससुर की देखभाल न करना 'क्रूरता' नहीं, बेटे की जिम्मेदारी.
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बहू द्वारा सास-ससुर की देखभाल न करना 'क्रूरता' या कानूनी अपराध नहीं है.
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अदालत ने कहा कि पत्नी का प्राथमिक वैवाहिक कर्तव्य पति और बच्चों के प्रति है, न कि कानूनी रूप से सास-ससुर के प्रति.
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सामाजिक और सांस्कृतिक अपेक्षाएं कानूनी जिम्मेदारियों से भिन्न हो सकती हैं, जिनकी अदालत जांच नहीं करती.
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माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के अनुसार, माता-पिता की देखभाल की प्राथमिक जिम्मेदारी बेटे की है.
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बहू का सास-ससुर की संपत्ति पर सीधा कानूनी अधिकार नहीं है; उसके अधिकार पति की अर्जित संपत्ति तक सीमित हैं.
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