शादी से पहले मोहब्बत: इस्लाम में क्या जायज और नाजायज? मुफ्ती ने शरिया की सीमाएं बताईं

अलीगढ़
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News18•27-01-2026, 08:52
शादी से पहले मोहब्बत: इस्लाम में क्या जायज और नाजायज? मुफ्ती ने शरिया की सीमाएं बताईं
- •उत्तर प्रदेश के रॉयल चीफ मुफ्ती, मौलाना चौधरी हुसैन ने स्पष्ट किया कि इस्लाम मोहब्बत को हराम नहीं मानता, बल्कि शरिया की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले कार्यों को गलत मानता है.
- •अगर किसी लड़की के दिल में किसी के लिए मोहब्बत पैदा होती है और उसका इरादा शरिया के दायरे में निकाह तक ले जाने का है, तो ऐसी मोहब्बत जायज है.
- •मोहब्बत हराम हो जाती है अगर वह नाजायज हरकतों, रोमांटिक बातचीत, अनुचित चैटिंग या शरिया की सीमाओं का उल्लंघन करती है.
- •महज दिल का झुकाव या किसी को पसंद करना गुनाह नहीं है; गुनाह तब होता है जब यह लगाव अल्लाह और शरिया द्वारा वर्जित कार्यों की ओर ले जाता है.
- •शादी से पहले लड़के और लड़की का अकेले मिलना जायज नहीं है; अगर मुलाकात जरूरी हो तो दोनों परिवारों के जिम्मेदार सदस्यों की मौजूदगी में ही हो सकती है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: इस्लाम में शादी से पहले मोहब्बत जायज है, बशर्ते उसका इरादा निकाह हो और शरिया की सीमाओं का पालन किया जाए.
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