खाजा: उत्तर प्रदेश की पारंपरिक मिठाई का इतिहास और बेटी की विदाई से जुड़ा इसका महत्व. जानें देसी स्वाद की कहानी.
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खाजा: बलिया की पारंपरिक मिठाई, बेटी की विदाई और शुभ अवसरों का मीठा स्वाद.
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News18•20-02-2026, 23:26
खाजा: बलिया की पारंपरिक मिठाई, बेटी की विदाई और शुभ अवसरों का मीठा स्वाद.
•खाजुली या खाजा, मैदे से बनी एक परतदार मिठाई है जो कुरकुरी होती है और मीठी चाशनी में डूबी रहती है.
•यह शादियों, तिलक समारोहों और खासकर बेटी की विदाई में शुभ मानी जाती है, इसके बिना रस्में अधूरी लगती हैं.
•सैकड़ों साल पुराना इतिहास रखने वाली यह मिठाई समय के साथ और भी परिष्कृत हुई है, इसका देसी स्वाद बरकरार है.
•इसे मैदे को गुनगुने पानी और रिफाइंड तेल से गूंथकर, पतली रोटियां बेलकर परतें बनाकर, आकार देकर, तलकर और फिर गर्म चाशनी में डुबोकर बनाया जाता है.
•160-180 रुपये प्रति किलोग्राम की किफायती कीमत पर उपलब्ध, खाजुली यात्राओं और उपहारों के लिए लोकप्रिय है, शादी के मौसम में इसकी मांग बढ़ जाती है, यह बलिया में शनिचरी मंदिर के पास मुन्ना स्वीट्स पर मिलती है.