भारत के किण्वित पेय: आंत के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली पारंपरिक वापसी

जीवनशैली
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Moneycontrol•20-01-2026, 14:24
भारत के किण्वित पेय: आंत के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली पारंपरिक वापसी
- •काली गाजर की कांजी, छाछ और लस्सी जैसे पारंपरिक भारतीय किण्वित पेय अपने स्वास्थ्य लाभों और मौसमी खान-पान से जुड़ाव के कारण फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं.
- •भारतीय रसोई में किण्वन एक पुरानी प्रथा है, जो पाचन में सहायता करती है, भोजन को संरक्षित करती है और लाभकारी बैक्टीरिया को बढ़ावा देकर आंत के स्वास्थ्य को मजबूत करती है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
- •इन पेय पदार्थों को आधुनिक मेनू पर समकालीन बदलावों के साथ फिर से प्रस्तुत किया जा रहा है, जैसे चुकंदर की कांजी और कारीगर लस्सी के स्वाद.
- •विशेषज्ञ आंत को अनुकूल बनाने के लिए दही या छाछ जैसे परिचित किण्वित खाद्य पदार्थों की छोटी, नियमित मात्रा से शुरुआत करने की सलाह देते हैं.
- •रेस्तरां और आतिथ्य ब्रांड स्वाद के अलावा पाचन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और समग्र कल्याण के लिए किण्वित खाद्य पदार्थों में बढ़ती रुचि देख रहे हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: पारंपरिक भारतीय किण्वित पेय वापस आ रहे हैं, जो आंत के स्वास्थ्य और पाक नवाचार के लिए महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करते हैं.
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