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News1812-01-2026, 14:03

निमाड़ की पुरानी परंपरा: घी में पका देसी मुर्गा, सालभर नहीं आती कमजोरी

  • मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में, ग्रामीण सर्दियों में देसी मुर्गे को घी में पकाकर खाते हैं, जिससे सालभर कमजोरी नहीं आती.
  • विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में पाचन तंत्र मजबूत होता है, जिससे शरीर भारी और पौष्टिक भोजन आसानी से पचा लेता है.
  • यह परंपरा शरीर को आंतरिक शक्ति, ऊर्जा और गर्मी प्रदान करती है, जिससे ठंड से बचाव होता है.
  • कई लोग एक पूरा मुर्गा 3-4 बार में खाते हैं, उनका मानना है कि इससे अधिक लाभ और पूर्ण पोषण मिलता है.
  • पशु चिकित्सक डॉ. भरत पटेल के अनुसार, घी में पका मुर्गा 10-12 घंटे बाद भी सुरक्षित रूप से दोबारा गर्म करके खाया जा सकता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: निमाड़ की सर्दियों की परंपरा में घी में पका देसी मुर्गा सालभर ताकत और गर्मी प्रदान करने वाला माना जाता है.

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